जयपुर में करोड़ों रुपये की कपड़ा ठगी के पीछे बेहद सुनियोजित साजिश का खुलासा हुआ है। किराए का मकान, नई फर्मों का गठन, समय पर भुगतान और बाजार से ज्यादा मुनाफे का लालच देकर एक दंपती ने पहले व्यापारियों का भरोसा जीता और फिर करोड़ों रुपये का माल व बैंक से बिजनेस लोन लेकर देश छोड़ दिया।
करीब 8.30 करोड़ रुपये की कपड़ा धोखाधड़ी के मामले में मुहाना थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी पवन चाण्डक को गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी में थाना स्पेशल टीम के ओम डोबर और दामोदर सारण की अहम भूमिका रही।
डीसीपी साउथ राजर्षि राज के अनुसार, पवन चाण्डक अपनी पत्नी राधिका के साथ मानसरोवर के वीटी रोड स्थित एक किराए के मकान में रहने लगा। इसके बाद सांगानेर इलाके में हरप्यारी एक्सपोर्ट और राधिका इम्पोर्ट एंड एक्सपोर्ट के नाम से दो फर्में शुरू की गईं। आरोपी के दस्तावेजों में फलोदी जिले के मनोता गांव का पता दर्ज था, जबकि वह लंबे समय से वहां नहीं रह रहा था। इसी पहचान का इस्तेमाल कर फर्मों का पंजीकरण कराया गया।
जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश पहले से तय योजना के तहत अंजाम दी गई। गिरोह के हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। किसी ने ऑफिस किराए पर लिया, किसी ने फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराया, जबकि कुछ लोगों ने शुरुआती कारोबार के लिए फंड उपलब्ध कराया ताकि बाजार में विश्वसनीयता बनाई जा सके।
शुरुआत में दंपती व्यापारियों से कपड़ा खरीदते और हर भुगतान तय समय पर करते थे। इतना ही नहीं, कई सौदों में बाजार से अधिक मुनाफा देकर व्यापारियों का भरोसा भी जीत लिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पवन की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। इसलिए उसके सहयोगी शुरुआती भुगतान के लिए आर्थिक मदद करते रहे, ताकि बाजार में उसकी साख मजबूत हो और बाद में बड़े स्तर पर ठगी की वारदात को अंजाम दिया जा सके।