5 साल में न शहरों के वोटर बढ़े, न गांवों से शहरों में पलायन हुआ
शहरी निकायों के चुनावों की वोटर संख्या सामने आने के बाद पिछले 4 दशक से चला आ रहा ‘गांवों से शहरों की ओर पलायन’ का दावा कमजोर नजर आ रहा है. 2019 से 2021 के निकाय चुनाव के समय करीब 1.33 करोड़ शहरी वोटर थे. अब यह संख्या बढ़कर 1.43 करोड़ हो गई है. यानी 5 साल में शहरी वोटर सिर्फ 10 लाख ही बढ़े हैं. दूसरी तरफ परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या करीब डेढ़ गुना कर दी गई है.
शहरों में निकाय और वार्ड बढ़े, वोटर नहीं
पिछले चुनाव के समय प्रदेश में कुल 196 नगर निगम और पालिकाएं थीं, जो अब बढ़कर 309 हो गई हैं. वहीं वार्ड पहले 7280 थे, जिन्हें 2965 बढ़ाकर 10,245 कर दिया गया है. आबादी भी डेढ़ गुना बढ़ने का अनुमान था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
गांवों में मतदाता बढ़े, शहरों में नहीं
प्रदेश के 309 शहरों में सिर्फ 10-12 लाख वोटर बढ़ने का मतलब है कि औसतन एक शहर में 3 से 10 हजार वोटर भी नहीं बढ़े. दूसरी तरफ गांवों के मतदाता 3 करोड़ से बढ़कर 4.02 करोड़ हो चुके हैं. इस बार वन स्टेट-वन इलेक्शन के तहत शहरों और गांवों के कुल 5.45 करोड़ मतदाता शहर से लेकर गांव की सरकार चुनेंगे.
309 निकायों के 10,245 वार्डों में होगा मतदान
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों में दो चरण में मतदान कराया जाएगा. शहरों के 16,482 मतदान केंद्रों पर 1 करोड़ 43 लाख 75 हजार 806 मतदाता वोट डाल सकेंगे.
पिछली बार से 96 नगर पालिकाएं बढ़ीं
इस बार प्रदेश में 248 नगर पालिकाएं हैं, जबकि पिछली बार 152 थीं. यानी नगर पालिकाओं की संख्या 96 बढ़ गई है. नगर परिषद 34 से बढ़कर 47 हो गई हैं. वहीं नगर निगमों की संख्या 10 ही है. 2019-20 के दौरान प्रदेश के तत्कालीन कुल 196 निकायों में मतदाताओं की संख्या करीब 1.33 करोड़ थी.