1 जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले जुड़वा सकेंगे मतदाता सूची में नाम
राजस्थान में होने वाले आगामी नगरपालिका और पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा कानूनी बदलाव किया है। फर्जी मतदान के मामलों में अब भारतीय दंड संहिता (IPC) नहीं, बल्कि देश के नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में पहली बार फर्जी वोटिंग पर रोक लगाने के लिए BNS की धाराओं का इस्तेमाल होगा। अब तक ऐसे मामलों में पुलिस IPC की धारा 171-D और 171-F के तहत मुकदमा दर्ज करती थी। लेकिन इस बार आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एफआईआर में पुरानी आईपीसी धाराओं के बजाय BNS की धारा 172 और 174 लागू की जाएंगी, गौरतलब है कि फर्जी मतदान के अपराध में 1 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
वोटर आईडी नहीं है तो भी कर सकेंगे मतदान... 11 वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य
मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) नहीं होने पर भी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए 11 वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों को मान्यता दी है। इनमें आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन संबंधी दस्तावेज, बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक सहित अन्य निर्धारित दस्तावेज शामिल हैं। इनमें से किसी एक वैध दस्तावेज को दिखाकर मतदान किया जा सकेगा।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की सुविधा जारी
नगरपालिका और पंचायत चुनावों को देखते हुए मतदाता सूचियों का अद्यतन कार्य जारी है, राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जनवरी, 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर तैयार की गई निर्वाचक नामावली में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लोक सूचना जारी होने की तिथि तक मतदाता सूची को अपडेट कराया जा सकेगा, जिन नागरिकों की आयु 1 जनवरी, 2026 को 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
इसके अलावा, जिन मतदाताओं का निधन हो चुका है, जो स्थायी रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरित हो गए हैं या जिनके नाम दो स्थानों पर दर्ज हैं, उनके नाम हटाने के लिए संबंधित कार्यालय में निर्धारित प्रपत्र के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है।