जिसे नाथू समझकर किया अंतिम संस्कार, चार दिन बाद जिंदा मिला
अजमेर के पुष्कर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार के साथ-साथ पुलिस को भी हैरान कर दिया। जिस घर में चार दिन पहले मातम पसरा था, वहां अचानक खुशियां लौट आईं। परिवार ने जिस शव को नाथू रैगर का मानकर अंतिम विदाई दी थी, वही नाथू चार दिन बाद मजदूरी करता हुआ जिंदा मिल गया।
पुलिस के अनुसार, 20 सितंबर को पुष्कर में सरकारी अस्पताल के पीछे एक युवक का शव मिला था। शव की तलाशी के दौरान नाथू पुत्र शंकर रैगर के नाम की अस्पताल की पर्ची मिली। पर्ची पर दर्ज मोबाइल नंबर पर पुलिस ने संपर्क किया तो नाथू की पत्नी ने बताया कि उसकी अपने पति से पिछले दो-तीन साल से अनबन है और उसका उससे कोई संपर्क नहीं है।
इसके बाद 21 सितंबर को नाथू का भाई और बेटा पुष्कर थाने पहुंचे और मोर्चरी में रखे शव की पहचान नाथू के रूप में कर दी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और परिवार ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
चेहरा दिखाए बिना सौंपा शव, अंतिम संस्कार के बाद खुला पूरा राज
नाथू की पत्नी मनभर देवी के अनुसार, 20 सितंबर की सुबह पुष्कर थाने से उन्हें पति की मौत की सूचना दी गई थी। पुलिस ने बताया था कि एक लावारिस शव मिला है और उसकी जेब में नाथू, उसके गांव और मोबाइल नंबर से संबंधित पर्ची मिली है।
इसके बाद वह अपने बेटे त्रिलोक और कुछ ग्रामीणों के साथ अस्पताल पहुंचीं। उनका कहना है कि पुलिस ने शव का चेहरा नहीं दिखाया। उन्हें बताया गया कि शव काफी सड़ चुका है और उसमें से दुर्गंध आ रही है। इसके बाद परिजन शव लेकर चले गए और 21 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार में शोक का माहौल था। तीसरे की बैठक के बाद घर में बारहवें की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान परिजनों को जानकारी मिली कि नाथू जिंदा है और मजदूरी कर रहा है। परिवार के लोग तुरंत बताए गए स्थान पर पहुंचे। वहां नाथू को जिंदा देखकर सभी हैरान रह गए। उसे साथ लेकर परिवार घर लौटा तो मातम का माहौल अचानक खुशी में बदल गया।
अब सबसे बड़ा सवाल- आखिर किसका था वह शव?
नाथू के जिंदा मिलने के बाद अब पूरा मामला एक नई पहेली बन गया है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस शव को नाथू समझकर परिजनों को सौंपा गया और जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया, वह आखिर किसका था।
जांच में यह भी सामने आया है कि भवन निर्माण श्रमिक नाथू पहले भी कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहता था। उसकी लंबे समय तक गैरमौजूदगी परिवार के लिए नई बात नहीं थी। इसी वजह से शव की पहचान करते समय परिजनों को नाथू के होने का शक हुआ और उन्होंने उसकी पहचान कर दी।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मृतक के पास नाथू के नाम की पर्ची आखिर कैसे पहुंची। क्या शव की पहचान में गलती हुई या इसके पीछे कोई और वजह है, इसकी जांच की जा रही है।
पुष्कर थानाधिकारी अशोक बिस्सु के अनुसार, परिजनों ने शव की पहचान की थी और पोस्टमार्टम के बाद उसे उन्हें सौंप दिया गया था। चार दिन बाद नाथू के जिंदा मिलने की जानकारी सामने आई। मृतक की पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए जांच हेतु सैंपल सुरक्षित रखा गया है। अब डीएनए रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अंतिम संस्कार किए गए शव की वास्तविक पहचान क्या थी और इस पूरी घटना के पीछे आखिर क्या सच है।