राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी एमबीएस अस्पताल में रिकॉर्ड को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। अस्पताल के दस्तावेजों में 86 वर्षीय रामकन्या देवी को एक महीने से भर्ती दिखाया गया है। साथ ही उनके नाम पर पांच-पांच हजार रुपये के तीन ह्यूमन एल्बुमिन इंजेक्शन दिए जाने की एंट्री दर्ज है। इन तीन इंजेक्शनों की कुल कीमत करीब 15 हजार रुपये बताई गई है। दूसरी ओर, रामकन्या देवी अपने घर पर आराम करती मिलीं। उन्होंने बताया कि वह स्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती नहीं हुई थीं। इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल के रिकॉर्ड और दवाओं के वितरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
घर पर आराम करती मिलीं बुजुर्ग, रिकॉर्ड में भर्ती
जानकारी के अनुसार, नयापुरा निवासी 86 वर्षीय रामकन्या देवी को अस्पताल के रिकॉर्ड में 10 सितंबर की शाम 6:16 बजे इमरजेंसी में भर्ती दिखाया गया था। दस्तावेजों में उन्हें यूनिट-ए महिला मेडिकल वार्ड में भर्ती बताकर आठ दिनों के भीतर तीन इंजेक्शन दिए जाने की एंट्री दर्ज है। हालांकि, रामकन्या देवी का कहना है कि वह स्वस्थ हैं और अस्पताल में भर्ती नहीं हुई थीं।
डॉक्टर की सील को लेकर उठे सवाल
इंजेक्शन के डिमांड पत्र पर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. श्याम बिहारी मीणा की मुहर दर्ज थी। इस बारे में पूछे जाने पर डॉक्टर ने कहा कि 6 अक्टूबर को उनकी ड्यूटी नहीं थी और पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं। उन्होंने आशंका जताई कि वार्ड में रखी उनकी सील का किसी कर्मचारी ने दुरुपयोग किया हो सकता है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी से इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है।
15 हजार के इंजेक्शन की एंट्री, अब रिकॉर्ड पर सवाल
ह्यूमन एल्बुमिन इंसानी रक्त के प्लाज्मा से प्राप्त प्रोटीन है, जिसका इस्तेमाल विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया जाता है। ऐसे में एक बुजुर्ग के नाम पर तीन महंगे इंजेक्शन जारी होने और अस्पताल में भर्ती दिखाए जाने के रिकॉर्ड पर सवाल उठ रहे हैं। मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रिकॉर्ड में कथित विसंगति कैसे हुई, इंजेक्शन वास्तव में किसे दिए गए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।