जेलर ने दो महिला बंदियों को निजी आवास पर क्यों पहुंचाया?
मामला अजमेर सेंट्रल जेल परिसर स्थित महिला बंदी सुधार गृह का है। पुलिस जांच के अनुसार तत्कालीन जेलर दिव्या चौधरी ने प्रहरी सोनिया चौधरी की मदद से दो महिला बंदियों—हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रही किरण उर्फ सेठा और हत्या के मामले में विचाराधीन सना—को जेल से बाहर निकाला। दोनों को जयपुर रोड स्थित दिव्या के निजी आवास पर ले जाया गया था।
पूछताछ में दिव्या ने पुलिस को बताया कि दोनों महिला बंदियों को घर की साफ-सफाई के लिए ले जाया गया था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कोर्ट की अभिरक्षा में मौजूद बंदियों को निजी काम के लिए जेल से बाहर ले जाना नियमों के खिलाफ है। CCTV फुटेज, रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाई।
निलंबन के बाद गायब थीं दिव्या, साइबर तकनीक से पहुंची पुलिस
मामला सामने आने के बाद जेल मुख्यालय ने दिव्या चौधरी और प्रहरी सोनिया चौधरी को पहले अजमेर से मुख्यालय जयपुर एपीओ किया और बाद में दोनों को निलंबित कर दिया। दिव्या को बीकानेर सेंट्रल जेल और सोनिया को जोधपुर सेंट्रल जेल से अटैच किया गया था।
इसके बाद दोनों के ड्यूटी से गैरहाजिर होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने संभावित ठिकानों की तलाश के साथ साइबर तकनीक का सहारा लिया। इसी दौरान दिव्या की लोकेशन कोटा में मिली। पुलिस टीम ने कुनाड़ी स्थित आवासीय फ्लैट पर दबिश देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। वहीं प्रहरी सोनिया चौधरी अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है।
12 जुलाई तक थीं जेलर, अब उसी जेल में बंदी
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 12 जुलाई तक दिव्या चौधरी इसी महिला बंदी सुधार गृह की जेलर थीं। जहां कभी उनके आदेश चलते थे, गिरफ्तारी के बाद अब अदालत के आदेश पर उसी परिसर में उन्हें बंदी के तौर पर दाखिल किया गया है।
पेशी के दौरान दिव्या चेहरे पर मास्क लगाए नजर आईं और फोटो खिंचवाते समय उनके चेहरे पर मुस्कान भी दिखाई दी। अदालत ने उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए। अब पुलिस की जांच का अगला फोकस प्रहरी सोनिया चौधरी की गिरफ्तारी और दोनों महिला बंदियों को निजी आवास तक ले जाने के पीछे की पूरी भूमिका पर है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।