हनुमानगढ़ के संगरिया में तीन साल से लापता प्रशांत आखिरकार अपने परिवार से मिल गया। नहर के पास बेसहारा हालत में मिले प्रशांत की पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई। परिजनों के संगरिया आने में असमर्थ होने पर डेरा सेवादार उसे करीब 2500 किलोमीटर दूर उड़ीसा के भुवनेश्वर लेकर पहुंचे और मां सलोचना को सौंपा। तीन साल बाद बेटे को सामने देखकर मां की आंखों से आंसू छलक पड़े।
नहर के पास बेसहारा मिला था प्रशांत, सोशल मीडिया से शुरू हुई तलाश
संगरिया के भगतपुरा रोड स्थित नहर के पास राजपाल और शंकरलाल को करीब 30 वर्षीय प्रशांत मानसिक रूप से परेशान हालत में मिला था। दोनों उसे मानवता भलाई केंद्र लेकर पहुंचे, जहां उसकी देखभाल शुरू की गई। इसके बाद प्रशांत के परिवार की तलाश के लिए सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की गई।
सोशल मीडिया के जरिए प्रशांत की बहन रुबीना और मां सलोचना से संपर्क हुआ। परिजनों ने बताया कि प्रशांत करीब तीन साल पहले घर से निकल गया था। इसके बाद परिवार ने उसे काफी तलाशा, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस दौरान प्रशांत के एक बेटे का जन्म भी हुआ, जिसे वह अब तक देख नहीं पाया था।
2500 किलोमीटर दूर था परिवार, सेवादार खुद प्रशांत को लेकर निकले
प्रशांत का परिवार उड़ीसा में था और संगरिया से दूरी करीब 2500 किलोमीटर थी। आर्थिक और अन्य परिस्थितियों के कारण परिजन संगरिया आने में असमर्थ थे। ऐसे में डेरा सेवादार लालचंद, पवन और रवि ने खुद प्रशांत को उसके परिवार तक पहुंचाने का फैसला किया।
सेवादार प्रशांत को लेकर उड़ीसा के लिए रवाना हुए। परिवार से मिलाने के लिए उन्हें आने-जाने में करीब 5000 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ा। आखिरकार वे भुवनेश्वर पहुंचे और प्रशांत को उसके परिवार के पास ले गए।
भुवनेश्वर में मां को सौंपा बेटा, तीन साल बाद छलके आंसू
भुवनेश्वर में एसआई आशीष नायक की मौजूदगी में प्रशांत को उसकी मां सलोचना के सुपुर्द किया गया। तीन साल बाद जब मां ने अपने बेटे को सामने देखा तो वह भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। लंबे समय बाद परिवार में प्रशांत की वापसी से खुशी का माहौल बन गया।
परिवार और पुलिस ने प्रशांत को सुरक्षित घर तक पहुंचाने के लिए डेरा सेवादारों के प्रयास की सराहना की।