साइबर अपराधियों के हाथों अपनी मेहनत की कमाई गंवाने वाले लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। राजस्थान पुलिस ने ठगी की रकम पीड़ितों तक वापस पहुंचाने के लिए मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) शुरू किया है। इस व्यवस्था के तहत करीब 9 हजार मामलों में 6 करोड़ रुपये वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है
शिकायत के बाद बैंक खातों की होगी जांच
ठगी होने पर पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद संबंधित बैंक खातों में रोकी गई रकम का पता लगाया जाएगा। पुलिस और संबंधित वित्तीय संस्थाएं शिकायत की जांच, खाताधारक के सत्यापन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद राशि लौटाने की कार्रवाई करेंगी।
छोटी रकम के मामलों में प्रक्रिया होगी सरल
रिपोर्ट के अनुसार, 50 हजार रुपये तक की फ्रीज रकम वाले मामलों के लिए प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में परिस्थितियों और निर्धारित नियमों के अनुसार हर बार एफआईआर या अदालत के आदेश की जरूरत नहीं होगी। अधिक राशि वाले मामलों में संबंधित दस्तावेजों और कानूनी आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
ठगी की रकम अटकने से परेशान थे लोग
साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों में रकम रोक दिए जाने के बाद उसे वापस हासिल करना कई पीड़ितों के लिए लंबी प्रक्रिया बन जाता है। रिपोर्ट में करीब 162 करोड़ रुपये की होल्ड राशि का उल्लेख किया गया है। नए मॉड्यूल का मकसद शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाना और पात्र पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है।
फर्जी खातों पर भी पुलिस की नजर
साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों की पहचान करने के उद्देश्य से पुलिस ने ‘म्यूल हंटर’ अभियान चलाया। अखबार में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, 31 मई 2026 तक इस अभियान के तहत 925 मामले दर्ज किए गए और 1,106 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। अभियान के जरिए संदिग्ध खातों और उनसे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच की गई।
क्या करें पीड़ित?
यदि आपके साथ ऑनलाइन ठगी हुई है, तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शिकायत संख्या, बैंक लेनदेन का विवरण और संबंधित सबूत सुरक्षित रखें। रकम की वापसी जांच के नतीजों और लागू नियमों पर निर्भर करेगी।